कभी ख्वाबों में मिलें तो, कभी खयालौं में
कभी जलते हुए दीयों मे।
कभी रोते दिल को सुकून देने चली आती हो तो,
कभी बीते लम्हों मे मुस्कान छा जाने।
कभी आंखों में नमी बनके समा जातेे हो तो,
कभी जिंदगी की राहों में ठहर ।
कभी सुलझे हुए दिल को उलझाने आ जाती हो तो,
कभी सोए अरमानौं को जगाने।
कौन हो तुम, कभी तन्हाइयों में दिख जाते हो तो
कभी सन्नाटा में भी ढूंढ लेती हो।
अब आदत ही बन चुकी हो जो,
ऐसे अकेले में बस छोड़ के न जाया करो!
© शशिकांत महाॅन्ती

Kabhi Kabhi mere Dil mein BHI khayaal ata Hain ki tum yahin ho..yahin kahin ho...chup ke mujhe Dekh rahi him...meri nazakatein, meri shararatein ....malum Hain mujhe ...beautiful lines Shashi
ReplyDeleteThank you so much, Sandeep!
DeleteEnjoyed it
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